HOW TO TEST LAPTOP MAINBOARD SIGNALS ON DSO - डिजिटल स्टोरेज ऑसिलोस्कोप (DSO ) से टेस्टिंग आसान कैसे करे
Test Admin (21 Apr 2025)

सामान्य व लगातार के अलावा भी जिस वोल्टेज व क्षणिक आने वाले सिग्नल्स को मल्टीमीटर नही माप पाता उसे डिजिटल स्टोरेज ऑसिलोस्कोप (DSO) पर मापा व रेकॉर्ड किया जाता है। DSO से क्लॉक फ्रीक्वेंसी,क्षणिक आने वाले वोल्टेज,कनवर्टर के PWM पल्स,चोक कॉइल पर कनवर्टर के वोल्टेज,कुछ समय के लिए ही आने वाले सिग्नल,फैन के PWM सिग्नल्स आदि आसानी से मापे जाते है वरन दो चेनल का प्रयोग कर पहले व बाद में आने वाले वोल्टेज,पॉवर सीक्वेंस का पता भी लगा सकते है। पॉवर सप्लाई की शुध्दता का पता रिप्पल्स,हार्मोनिक्स व ग्लिच जांचकर भी लगाया जाता है।
वैसे तो एक DSO में बहुत सारे बटन ओर नॉब होती है जिससे ट्रिग्गर लेवेल, स्लोप. वोल्टेज,टाइमबेस,कपलिंग, AC/DC मोड आदि सेट किये जाते है जिसकी जानकारी उसके साथ आने वाले मैन्युअल में दी होती है परंतु लैपटॉप बोर्ड को 1V/DIV तथा 200mS DC मोड से चेक करना उचित रहेगा।एक किसी निश्चित सेटिंग पर अच्छे और खराब बोर्ड के वेवफॉर्म को तुलनात्मक रूप से भी टेस्ट किया जाता है।पावर ट्रिप के फ़ाल्ट 500mS की रेंज पर देखना उचित रहेगा।
जिस तरह किसी विशिष्ट रेडियो स्टेशन को ट्यून करने के लिए उसकी सिग्नल प्रकार व फ्रीक्वेंसी का पता होना चाहिए इसी तरह मापे जाने वाले सिग्नल, वोल्टेज व फ्रीक्वेंसी का पता कर DSO की सेटिंग उसी प्रकार करना होती है और पहले से पता नही होने पर उसके वोल्ट डिवीज़न तथा टाइम बेस नॉब को घुमाकर भी ट्यून किया जाता है। कुछ गणना DSO के स्वचालित AUTO मोड के द्वारा भी की जा सकती है। क्षणिक लो अथवा हाई होने वाले सिग्नल्स को उसकी प्रकृति अनुसार ट्रिगर दे कर सेट कर मापा जाता है।

DSO में एक वेवफार्म को स्टोर करने की सुविधा भी होती है तथा उसे रेफरेन्स में सेट कर दूसरी से अंतर भी पता कर लेते है। मेजरमेंट बटन से वेवफॉर्म की समस्त पैरामीटर का पता भी चल जाता हैं।
टाइम बेस: 1 सेकंड में 1000 मिलि सेकंड्स (mS) होते है तथा 1मिली सेकंड में 1000 माइक्रो सेकण्ड्स (uS) होते है।इसी तरह 1 माइक्रोसैकेण्ड में 1000 नेनो सेकण्ड्स (nS) होते है।
पीरियड व फ्रीक्वेंसी का यह फॉर्मूला होता है।
Wave Period = 1/ Frequency
मनुष्य की आंखे एक सेकंड में 16 तक के उतार चढ़ाव को देख सकती है इसी प्रकति के कारण TV या डिस्प्ले मॉनिटर की वर्टीकल फ्रीक्वेंसी या फ्रेम की प्रति सेकंड दर को 50 या उससे थोड़ा अधिक रखा जाता है।विद्युत बोर्ड से प्राप्त सप्लाई भी 50HZ की होती है परंतु उसके प्रभाव को हमारी आंखे नही पकड़ पाति है।यह तो टाइम पीरियड़ सिर्फ 20 मिली सेकंड का ही है।

तो फिर 25MHZ का क्रिस्टल PCH की रिफरेन्स क्लॉक के लिए लगा होता है जो एक सेकंड में 25 लाख बार कंपन (साइकल) करता है अतः एक सेकंड में भाग देकर देखे तो इसका एक साईकल का टाइम पीरियड 40nS (नेनोसेकंड) होता है।अतः यदि हम इस क्रिस्टल की पल्स को 10nS की रेंज पर देंखे तो इसका एक पीरियड 4 खानों (डिवीज़न) में मिलेगा।इसी प्रकार PCH के RTC विभाग में लगा 32.768KHZ के क्रिस्टल का टाइम पीरियड एक साईकल का 30.52uS (माइक्रोसैकेण्ड) होता है। इसे देखने के लिए 10uS की रेंज पर 3 खानों में एक पीरियड दिख जाएगा।
क्रिस्टल की क्लॉक फ्रीक्वेंसी प्रोब कैपसिटेंस (प्रोबे का लंबा तार व ग्राउंड शील्ड के बीच इंसुलेशन के कारण उत्पन्न कैपसिटेंस) से प्रभावित हो जाती है अतः उसे 10X प्रोब से मापा जाता है।एक ही प्रोब में X1 व X10 चुनने का स्विच लगा होता है परंतु DSO की सेटिंग में भी इसको चुनना होता है।
इस ब्लॉग सीरीज में हम निम्न सिग्नल को टेस्ट कर अपनी रिपेयर स्किल को उन्नत कर अपने कार्य को आसान व फ़ास्ट रिजल्ट की ओर अग्रसर करेंगे.
- SATA सिग्नल
- LVDS
- EDP सिग्नल
- ब्राइटनेस (PWM) सिग्नल
- LED पैनल डिटेक्शन सिग्नल
- FDI सिग्नल
- RAM एड्रेस डेटा
- CS0,CKE0,ODT0
- PECI एक वोल्ट(1V) लेवल
- DMI सिग्नल
- SPD डिटेक्शन
- LPC बस वेव फॉर्म
- PLTRST#
- PG TIMINGS
- RIPPLES
- DC-DC CONVERTER OUTPUT etc.
TO BE CONTINUE..............