लैपटॉप सर्विसिंग के दोरान अति-आवश्यक सावधानियां
Test Admin (01 Feb 2025)

अधिकांशतः मदरबोर्ड की टेस्टिंग पावर सोर्स लगाकर करना होती है। जबकि ज्यादातर बोर्ड को प्रकाशित लेंस के ऑब्जरवेशन से, डायोड वैल्यू, ग्राउंड रेजिस्टेंस व कोल्ड टेस्टिंग से ही जांचने के प्रयास रखना चाहिए। फिर भी पावर सेक्शन व बहुत से टेस्टिंग पॉइंट्स को पॉवर लगी स्थिति में ही जांचा जाता है। हॉट टेस्टिंग के दौरान जाने अनजाने में दुघर्टना की संभावना बनी रहती है।अतः सावधानी बरतने व सुरक्षा उपायो की सहायता से दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम कर सकते है।
खुले बोर्ड को टेस्टिंग के दौरान पॉवर स्विच के पैड या पॉइंट को ट्वीज़र से ग्राउंड न कर यदि एक प्रोब की सहायता से करे तो श्रेयस्कर रहेगा। वोल्टेज मापन के लिए नुकीली प्रोब प्रयुक करे।एक दूसरी प्रोब में एक 100-200 ओम का रेसिस्टर सीरीज में लगाकर दुसरे छोर पर ग्राउंड क्लिप सोल्डर कर ले।यह विशेष प्रोब से ही पावर ऑन करे। जिससे यदि गलती से भी यह 3V या अन्य सप्लाई लाइन से भी जुड़ गई तो उस पर कुछ मिली एम्पेयर ही लोड रहेगा।एक समय मे एक ही पैड को कांटेक्ट करने से अकारण 3V लाइन में किसी फाल्ट से बचा जा सकता है। यही प्रोब किसी सिग्नल को लो कर टेस्ट करने में भी प्रयुव्त हो सकती है जैसे LID#, SYS_RST#,BATPRES# आदि।

मल्टीमीटर की प्रोब के अधिकांश खुले भाग को स्लीव लगाकर इन्सुलेट कर भी अन्यत्र छू जाने से बचाव किया जा सकता है।पॉवर चिप की पिन को प्रोब न लगाते हुए उससे जुड़े के कंपोनेंट या पैड पर मापना ज्यादा उचित रहेगा।
किसी पॉवर कनवर्टर में शॉर्टिंग या चिप बर्न होने से मुख्य पार्ट जैसे प्रोसेसर, चिपसेट शार्ट हो जाते है। चार्जिंग सेक्शन व EC सेक्शन को छोड़कर बचे सभी पॉवर कनवर्टर विभाग में गलत प्रोबिंग से भी CPU, चिपसेट व ग्राफ़िक चिप के शार्ट हो जाने का खतरा बना रहता है।अतः संभव हो तो आउटपुट सप्लाई का जम्पर पैड ओपन कर उस सप्लाई को टेस्ट करने के बाद ही फुल टेस्ट करे। नमी लगे हुए व वाटर डैमेज पॉवर सेक्शन को टेस्ट करने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है। नमी प्रभावित बूस्ट कैपेसिटर, TON रेसिस्टर व फीडबैक रेसिस्टर को कभी भी नजरअंदाज न करते हुए टेस्टेड नए पुर्जे ही लगाए।
कीबोर्ड, हार्डडिस्क आदि के मेटल पार्ट बोर्ड सर्किट से न छू सके इसलिए इन्सुलेटर के साथ साथ कुछ हिस्सों में नमी सोखने के लिए काली टेप लगी रहती है।इन्हें हल्के से उठाकर कंपोनेंट को जांचे। कोई रेसिस्टर कैपेसिटर चिपक कर गिर जाने की समस्या आ सकती है।नमी के कारण सूखे हुए हिस्से भी मुलायम ब्रश से कलीनर लगा कर साफ कर व वापस उसी स्थान पर टेप लगाना न भूले।
लैपटॉप सर्विसिंग के समय हीट सिंक कूलिंग पेस्ट को उचित मात्रा में ही लगायें।यदि कंडक्टिव पेस्ट लगा है तो विशेष सावधानियों से साफ करे, वह किसी कंपोनेंट पर नहीं गिरे, इसका भी ध्यान रखे।
प्लास्टिक कैबिनेट के अंदरूनी भाग पर ग्राउंड से शिल्ड के लिए कंडुक्टिव कोटिंग लगी रहती है। पावर लगी स्तिथि में बोर्ड का कोई भी पार्ट जो सिग्नल या पावर लाइन से जुड़ा हो, इससे छुना नही चाहिए।
उपयोग के साथ उपभोक्ता द्वारा लिड के बार बार खोलने बंद करने से हिंजेस टूटने व LCD केबल के कट जाने के मामले ज्यादा पाए जाते है। केबल कटने की आंशिक संभावना भी दिखे तो इसे बदल देना चाहिए। बैटरी कनेक्टर व सारे पावर सोर्स हटा कर ही इसे जांचे या बदले। कई बार पार्ट विक्रेता मिलते-जुलते मॉडल की एलसीडी केबल प्रदाय कर देते है।अतः इसे कोल्ड टेस्ट कर ही पॉवर लगा कर देंखे।विशेषकर B+ लाइन, USB कैमरे के 5V व LCD सप्लाई के 3V को विशेष रूप से वेरीफाय करे। इसी तरह FHD, टच स्क्रीन, गेमिंग मॉडल की केबल का पार्ट नंबर व वायरिंग अलग रहती है, उसका भी ध्यान रखे।स्क्रीन पैनल की डेटाशीट से मिलान करे। सिर्फ कनेक्टर के 30पिन- 40पिन के हिसाब से न देंखे।LCD की पावर लाइन के फ्यूज को कदापि बाईपास न कर सही वैल्यू का ही लगाए।
LCD केबल की बाहरी सतह भी ग्राउंड से शील्ड की होती है। पॉवर लगी स्थिति में उसके किसी हिस्से का बोर्ड के किसी कॉम्पोनेन्ट से टच हो जाना भी परेशानी खड़ी कर सकता है।
DC जैक की ID पिन भी किसी भी स्थिति में VIN से शार्ट नही हिना चाहिए अन्यथा EC व 3V विभाग के बर्न हो जाने का खतरा रहता है।
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